यदि भारत ने भी यूरोप की तरह “Zero Tolerance” नीति अपनाई होती, तो स्थिति शायद अलग हो सकती थी. कैसे? जाने विस्तार से …
विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) में जब एक नियामक (EASA) सख्त कदम उठाता है और दूसरा (DGCA) नहीं, तो सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यहाँ भारत की नियामक स्थिति द्वारा उठाए गए बिंदुओं का विश्लेषण दिया गया है:
1. भारत में प्रतिबंध क्यों नहीं लगा? (DGCA बनाम EASA)
यूरोप में EASA ने VSR पर प्रतिबंध मुख्य रूप से असहयोग (Non-cooperation) के कारण लगाया। जब उन्होंने मुंबई दुर्घटना (2023) के बाद डेटा मांगा, तो VSR ने जवाब नहीं दिया।
भारत में, DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के पास उस कंपनी का सीधा नियंत्रण था। DGCA ने दुर्घटना के बाद जांच शुरू की और VSR को परिचालन जारी रखने की अनुमति दी। भारत में अक्सर “निगरानी” (Surveillance) तो की जाती है, लेकिन जब तक कोई बहुत बड़ा उल्लंघन साबित न हो जाए, तब तक पूरे ऑपरेटर का लाइसेंस रद्द करने के बजाय विशिष्ट विमान या पायलट पर कार्रवाई की जाती है।
2. क्या यह नियामक चूक है?
इसे पूरी तरह “चूक” कहना तकनीकी रूप से जटिल है, लेकिन इसे “नरम रुख” जरूर कहा जा सकता है।
* अंतरराष्ट्रीय मानक: EASA के मानक अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सख्त माने जाते हैं।
* भारतीय ऑडिट: भारत में ऑडिट की प्रक्रिया अक्सर कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है। अगर एक कंपनी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (जैसे डेटा शेयरिंग) को पूरा नहीं कर पा रही थी, तो DGCA को भी उसी समय “रेड फ्लैग” जारी करना चाहिए था।
3. विमानन नीति और यात्री सुरक्षा
भारतीय एविएशन पॉलिसी में Charter/General Aviation (निजी विमानों) के नियम कमर्शियल एयरलाइंस (जैसे Indigo या Air India) की तुलना में थोड़े लचीले हैं।
* नजरअंदाजी: चार्टर विमानों के रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल की उतनी कड़ी निगरानी नहीं हो पाती जितनी होनी चाहिए।
* VVIP मूवमेंट: भारत में राजनीतिक रैलियों और VVIP मूवमेंट के दौरान अक्सर ऑपरेटरों पर कम समय में ज्यादा उड़ानें भरने का दबाव होता है, जिससे सुरक्षा मानकों से समझौता होने का खतरा बढ़ जाता है।
4. क्या बारामती दुर्घटना टाली जा सकती थी?
यदि भारत ने भी यूरोप की तरह “Zero Tolerance” नीति अपनाई होती, तो स्थिति अलग हो सकती थी:
* निवारक कार्रवाई (Preemptive Action): अगर EASA द्वारा उठाए गए ‘लेवल 1’ के सुरक्षा खतरों को संज्ञान में लेकर DGCA भी VSR का लाइसेंस निलंबित कर देता, तो वह हेलीकॉप्टर उड़ान ही नहीं भर पाता।
* सुरक्षा संस्कृति: जब एक ऑपरेटर को पता होता है कि छोटी सी भी लापरवाही से पूरा बिजनेस बंद हो सकता है, तो वे सुरक्षा (Maintenance) पर अधिक खर्च करते हैं। VSR के मामले में, बार-बार की चेतावनियों के बावजूद संचालन जारी रहना सुरक्षा के प्रति एक लापरवाह रवैये को दर्शाता है।
निष्कर्ष : यह स्पष्ट है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में ‘जवाबदेही’ (Accountability) की कमी है। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक कड़े कदम नहीं उठाए जाते। बारामती की घटना इस बात का दुखद उदाहरण है कि सुरक्षा मानकों में ढील किसी बड़े नेता या आम नागरिक की जान को जोखिम में डाल सकती है।

(विक्रांत पाटील)
8007006862 (SMS फक्त)
9890837756 (व्हॉटस्ॲप)
_Vikrant@Journalist.Com